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Saturday, February 22, 2020

कृषि विभाग जिले के 70 गावों को माडल के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इसके लिए हर ब्लाक से पांच गांव चयनित किए जाएंगे।

सिद्धार्थनगर जिले के 70 गांवों को माडल के रूप में विकसित करेगा कृषि विभाग 
गोरखपुर- सिद्धार्थनगर जनपद में कम लागत, अधिक पैदावार की तस्वीर खड़ी कर कृषि विभाग जिले के 70 गांवों को मॉडल के रूप में पेश करेगा। विभाग इसकी तैयारी में जुट भी गया है। प्रत्येक ब्लाक से पांच-पांच ऐसे गांव का चयन किया जा रहा है, जिनकी मिट्टी कम उपजाऊ है। प्रत्येक किसान के खेत की मिट्टी की निशुल्क जांच होगी। जांच के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किया जाएगा।किसानों को बताया जाएगा कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व हैं, ताकि वह जरूरत के हिसाब से उर्वरक का प्रयोग कर सकें। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की हालत सुधरेगी।मिट्टी में 12 पैरामीटर की जांच होगी, जिसमें पीएच, ईसी, आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिक, बोरोन, आयरन, मैगनीज, कॉपर शामिल हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसान को पता चल जाएगा कि खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है।चयनित गांव में कृषि विभाग की तरफ से विशेष कैंप लगाया जाएगा। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खेती-बारी से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। आसपास के गांव के किसानों को भी आंमत्रित किया जाएगा, ताकि वे भी जानकारी प्राप्त कर कम लागत में अच्छी पैदावार ले सकें।उन्नति खेती की तकनीकी सीखने के लिए जिले से किसानों का दल प्रदेश भ्रमण के लिए शुक्रवार को रवाना हो गया। यह लोग चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर में उन्नत किस्म की खेती करने के गुण सीखेंगे। कृषि भवन परिसर से उपनिदेशक कृषि एलबी यादव ने हरी झंडी दिखाकर बस को रवाना किया।किसानों की आय दोगुना करने को लेकर सरकार गंभीर है। इसके लिए तमाम प्रकार की योजनाएं चलाई जा रहीं है। कृषि विभाग की तरफ से किसानों को समय-समय पर जागरूक किया जाता है। ताकि वह कम लागत में बेहतर उत्पादन लेकर समृद्धशाली बन सकें। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले के 14 ब्लाकों से 290 किसानों को प्रदेश भ्रमण पर भेजा गया है। 21 से 24 फरवरी किसान कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर में प्रशिक्षण लेंगे। डीडी कृषि यादव ने बताया कि किसान खेती-बारी, मछली पालन, उद्यानीकरण आदि के क्षेत्र में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। वैज्ञानिकों से परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत आधुनिक पद्धति से सभी प्रकार की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा। किसानों को आने-जाने में कोई परेशानी न हो इसलिए अच्छी बसों की व्यवस्था की गई है। जिले के हर ब्लॉक से 20 किसान का चयन करते हुए प्रशिक्षण के लिये भेजा गया है। उनके आने-जाने, रहने खाने आदि की जिम्मेदारी विभाग की है।

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