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Tuesday, April 17, 2018

हिमोफिलिया एक आनुवंशिक रोग, रक्त स्त्राव से यह हो सकती है जानलेवा साबित - डा० रजनीश श्रीवास्तव

जौनपुर। विश्व हिमोफिलिया दिवस पर ईशा हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में एक संगोष्ठी संपन्न हुई जिसमें वरिष्ठ सर्जन डा० रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि हिमोफिलिया एक आनुवंशिक रोग है जिसमें शरीर से बहता हुआ रक्त जमता नहीं है। यह बीमारी पुरुषों में अधिक पाई जाती है। रक्त न जमने की वजह से दुर्घटना व चोट लगने पर अत्यधिक रक्त स्त्राव से यह जानलेवा साबित हो सकती है। इलाज से मरीज कुछ हद तक ठीक होता है लेकिन पूर्ण रूप से कभी ठीक नहीं हो पाता। 
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डा० स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि इसके लक्षण निम्न होते हैं जैसे जोड़ों में दर्द होना, लगातार मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक माहवारी होना, बड़े गहरे घाव, पेशाब या मल में लगातार लम्बे समय तक खून आना, शरीर में नीले निशान पड़ना। 
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा० मुकेश शुक्ल ने बताया कि भारत में भी लगभग दस हजार बच्चों में एक बच्चा हिमोफिलिया का मरीज है। हिमोफिलिया से बचने के लिए हमारी सर्कार ने भी कुछ कदम उठाये हैं। 
समाज में हिमोफिलिया का इलाज काफी महँगा है मगर दवाइयों के अलावा भी हिमोफिलिया का इलाज है जो हमारे जौनपुर में अभी सिर्फ ईशा हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में ही उपलब्ध है। हिमोफिलिया के मरीज को फैक्टर 8, फैक्टर 9 और फैक्टर 13 की जरूरत होती है। 
हिमोफिलिया मरीज को हम रक्त स्त्राव की स्थिति में क्रायो ट्रांसफ्यूज (फैक्टर 8, 9) करते हैं तो उक्त मरीज को अवश्य ही लाभ होगा और उसकी अत्यधिक रक्त स्त्राव का इलाज किया जा सकता है, जो कि ईशा हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में उपलब्ध है। उक्त बातें पैथोलॉजिस्ट डा० डी० सी० कोठारी ने संगोष्ठी में कही। 
ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल आफ इण्डिया एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश में पंजीकृत हिमोफिलिया के मरीजों को ईशा हॉस्पिटल ब्लड बैंक में बिना रक्त दिए ही रक्त उपलब्ध कराया जाता है। 
इस अवसर पर समस्त डॉक्टर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ तथा कुछ विशिष्ट नागरिक उपस्थित रहे।  

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