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Tuesday, April 17, 2018

नहीं रहे मशहूर शायर मुफ्ती मेंहदी हैदर उर्फ अंजुम जौनपुरी...

जौनपुर। हिन्दुस्तान के मशहूर शायरों में से एक मुफ्ती मेंहदी हैदर उर्फ अंजुम जौनपुरी का आज देहांत हो गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीएचयू के डॉक्टरों ने बताया था कि पैर की एक नस दब जाने के कारण पैर में इनफेक्शन फैल गया है। इनकी जिंदगी बचाने के लिए पैर का ऑपरेशन कर काटना आवश्यक था उनके बेटे मुफ्ती हैदर ने बीएचयू में उनके पैर का ऑपरेशन कराकर पैर काटा। इस दौरान उनकी हालत खराब थी कि वो अपनी याददाश्त ही भूल गये फिर उन्हें वापस घर लाया गया। एक बार पुन: उनके पैर को काटा गया। इस बार हालात ठीक थे पर आज उन्होंने इस दुनिया को आखिरकार अलविदा कह दिया।
मालूम हो कि नगर के अजमेरी मोहल्ले निवासी मुफ्ती मेंहदी हैदर उर्फ अंजुम शायरी की दुनिया में 1972 में बांदा में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरे में अपनी गजल पढ़कर रखा था।
आखिरी वक्त में उनका कहना था कि शायरी उनके जिस्म की रुह है और ये उनके मरने के बाद भी जिंदा रहेगी। उन्होंने अपनी मशहूर गजल 'रुक जाओ सुबह न हो, ये रात आखरी, शायद हो ये जिंदगी के लम्हात आखिरी, मरने के बाद कब्रा पर आना तुम जरुर, अंजुम यह कह रहा है कोई बात आखिरी" कहकर अपनी बात पूरी दुनिया के सामने रख दी।

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