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Wednesday, April 11, 2018

बिना सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण के रत्न धारण न किया जाय, पढ़ें पूरी खबर

vijay pratapजौनपुर। रत्न वस्तुतः भूगर्भ में पाए जाने वाले बहुत सारे रासायनिक तत्वों का संयोजन होते हैं। जिन्हें तराशकर रत्नों का स्वरूप दिया जाता है। बहुचर्चित रत्न पोखराज का रासायनिक सूत्र AL2O3 है। रत्नों को धारण करने की प्रक्रिया भारतीय इतिहास में हजारों वर्षों से चली आए रही है। 
प्रश्न यह है कि रत्नों को पहनने का आधार क्या होना चाहिए। हमने हमेशा यह कहते सुना है कि रत्न राशि के आधार पर पहने जाते हैं। परन्तु ऐसा बिलकुल भी नहीं है। सबसे पहले ये बात समझते हैं कि राशि क्या है, व्यक्ति की कुंडली में चन्द्रमा जिस राशि में बैंठता है उसे राशि कहते हैं। शास्त्र कहता है कि चन्द्रमा मन का कारक गृह है और जीवन में बहुत सारी बातें मन के आधार पर देखी जानी चाहिए। अतः कुंडली में राशि का महत्व है। आपने सुना होगा कि मेष राशि वाले मूंगा पहन लें, वृष राशि वाले हीरा पहन लें या धनु राशि वाले पोखराज पहन लें ऐसी अवधारणा समाज में व्याप्त है। परन्तु ऐसा करने से वहीँ मूंगा या पोखराज उस राशि वाले व्यक्ति को विभिन्न जगहों पर नकारात्मक प्रभाव देगा क्योंकि व्यक्ति की राशि कुंडली का एक छोटा सा भाग है। इसलिए आवश्यक है कि बिना सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण के रत्न धारण न किया जाय।

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