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Thursday, February 22, 2018

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुण्यतिथि पर अस्पतालों में फल वितरण

जौनपुर। प्रख्यात समाजवादी चिंतक  एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  स्वर्गीय राजपति सिंह  की पुण्यतिथि पर  गुरुवार को जिला पुरुष एवं महिला अस्पताल  के मरीजों को  फल वितरित किया गया। इस दौरान अतिथियों ने  उनके जीवन को  समाज के लिए  अनुकरणीय बताया। कहा उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.राजपति सिंह की पुण्यतिथि पर उनके पुत्र राजेश सिंह एवं बृजेश सिंह के साथ  डॉ जेपी सिंह, जयप्रकाश साथी, शशिकांत सिंह,  शिशिर सिंह, अभिषेक सिंह, उमेश सिंह, शुभम उर्फ गोलू, रत्तीलाल एवं सीएमएस डॉक्टर एस के पांडेय व महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामसेवक सरोज, उपेंद्र सिंह ने दोनों अस्पतालों में भर्ती सभी मरीजों के बीच फल वितरित किया।
स्व. सिंह ने सिरकोनी ब्लाक के सखोई गांव में एक साधारण कृषक परिवार में सन् 1917 में  जन्म लिया। विद्यार्थी जीवन से ही वे सामाजिक न्याय के लिए सदैव तत्पर रहते थे ।देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी अहम् भूमिका रही। क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद महात्मा गाँधी जी द्वारा 8 अगस्त 1942  की शाम को अंग्रेजों के विरुद्ध भारत छोड़ो आन्दोलन का आह्वान किया गया।अगले ही दिन 9 अगस्त 1942 को  पूरे देश में क्रांति की लहर दौड़ पड़ी। इस आन्दोलन में अप्रतिम योगदान दिए। काफी समय तक जेल में रहे। स्वतंत्रता के पश्चात भी वे विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े रहे ।उनका  मानना था कि हम वास्तविक  रूप में स्वतंत्र तभी हो सकते हैं जब हम ऐसे समतामूलक समाज की स्थापना कर सकें जिसमें समाज के संसाधनों पर सभी का अधिकार सुनिश्चित हो  सके उनका मानना था कि जब प्रकृति ने ने कोई भेद नहीं किया है तू मानव जात में भेदभाव क्यों उन्होंने ऐसी आर्थिक व्यवस्था की परिकल्पना की जिसमें  समाज के संसाधनों से समाज का समावेशी विकास हो सके |सामाजिक आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए जीवनभर संघर्षरत रहे समाजवादी पुरोधा डॉक्टर राम मनोहर लोहिया राजनारायण के निकट सहयोगीयों में से थे जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में श्री सिंह ने  जिले का संयोजन किया तथा देश में आपातकाल के दौरान जेल भी गए | काफी समय तक जेल में रहते हुए विभिन्न पार्टियों का पांडुलिपियों का संपादन भी किए |
22 फरवरी 1993 को उन्होंने इस दुनिया से विदा ले लिया और छोड़ गए समतामूलक समाज की स्थापना के लिए वैचारिक धरोहर जो अगली पीढ़ी को सामाजिक न्याय एवं चेतना को उत्साहित करने का कार्य करेगी|


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