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Thursday, February 1, 2018

आम बजट 2018 की जानिए खास बाते

नई दिल्ली - वित्त मंत्री अरुण जेटली 2018-19 का बजट पेश किया, अगले साल 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले का ये मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। बजट चूंकि पूरे साल का लेखा जोखा होता है इसलिए सरकार से लेकर आम आदमी तक को बजट से काफी उम्मीदें होती हैं। जेटली ने जैसे ही बैठ कर बजट भाषण पढ़ना शुरू किया वैसे ही आम जनता का दिल भी बैठने लगा। उम्मीदें लगी हीं कि टैक्स में छूट मिलेगी, आम जन से जुड़ी सुविधाएं सस्ती होंगी लेकिन ऐसा कुछ भी होती नजर नहीं आया। उन्होंने कहा कि  दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.3 प्रतिशत है, जिससे इस साल 20-17-18 में जीडीपी विकास दर 7.2 से 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है। भारत 2.5 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था।  आयकर छूट की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 40,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन यानी जितना वेतन है उसमें से 40,000 रुपये घटाकर जो रकम बचेगी उस पर टैक्स लगेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिक्लेम 50000 तक दिया जाएगा। 1.89 करोड़ कर्मचारियों ने 1.44 करोड़ रुपये का आयकर दिया जाएगा।
250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत टैक्स बढ़ाया गया 2018-19 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 3.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य फिर से रखा गया  जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में वित्तीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 
डायरेक्ट टैक्स वसूली 12.6 प्रतिशत तक बढ़ाई गई। इस साल से 85 लाख 51 हजार नए करदाता जुड़े। राष्ट्रपति की तनख्वाह पाँच लाख होगी, उपराष्ट्रपति की चार लाख रुपये और राज्यपाल की तनख्वाह साढ़े तीन लाख तक होगी। सांसदों का वेतन भी बढ़ेगा और हर पांच साल में सांसदों के भत्ते की समीक्षा की जाएगी। 2018-19 में विनिवेश से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
रेलवे
रेलवे के विस्तार पर 1.48 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की बात की, जबकि मुंबई रेल नेटवर्क के लिए 11,000 करोड़ रुपये और बेंगलूरू मेट्रो नेटवर्क के लिए 17,000 करोड़ रुपये दिए। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए वडोदरा में संस्थान बनाने की घोषणा। रोजगार
मुद्रा योजना के लिए तीन लाख करोड़ रुपये दिए। जबकि नए कर्मचारियों के लिए ईपीएफ में 12 फीसदी का योगदान सरकार करेगी। जबकि महिलाओं के लिए शुरुआती तीन सालों के लिए ईपीएफ योगदान घटाकर 8 फीसदी रखा गया है जबकि 70 लाख नई नौकरियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बजट बढ़ा कर 7148 करोड़ रुपये किया गया। स्वच्छ भारत मिशन के तहत छह करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण की बात की गई। जबकि 2018-19 में दो करोड़ नए शौचालय बनाने का लक्ष्य, 8 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने की घोषणा की गई। 
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के लिए 14.34 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया जबकि इफ्रांस्ट्रक्चर के लिए 50 लाख करोड़ रुपये जरूरत की बात कही। 
स्वास्थ्य
नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक का हेल्थ बीमा अब सरकार देगी जिससे करीब 50 करोड़ लोगों को हेल्थ बीमा की सुविधा मिलेगी।
टीबी मरीजों के लिए 600 करोड़ रुपये की स्कीम के साथ सरकार 24 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। 
ग्रामीण अर्थव्यवस्था
2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। जेटली ने कहा कि कम लागत में अधिक फसल उगाने पर सरकार जोर दे रही है वहीं किसानों को उनकी उपज का अधिक दाम दिलाने पर सरकार का फोकस।
कृषि उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर 275 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ। उपज पर लागत से डेढ़ गुना अधिक दाम मिले।
वहीं सरकार ने किसानों को उनके लागत का डेढ़ गुना देंने की घोषणा की जबकि खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना है। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर 8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। जबकि कृषि प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए 1400 करोड़ रुपये का अनुदान दिया। 
500 करोड़ रुपये की लागत से ऑपरेशन ग्रीन की घोषणा जबकि किसानों को कर्ज के लिए बजट में 11 लाख करोड़ रुपये दिए जाने का प्रस्ताव। देश में 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे जबकि अब पशुपालकों को भी  किसान क्रेडिट कार्ड मिलेगा। जेटली ने कहा कि विदेशी निवेश में बढ़ावा हुआ है।  

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