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Friday, November 3, 2017

जौनपुर में नगर निकाय निर्वाचन 2017 में निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों को दिशा निर्देश जारी

VPITSजौनपुर। नगर निकाय निर्वाचन में निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए आवश्यक सूचनाएं अध्यक्ष न.पा.परि./नगर पंचायत हेतु सम्बन्धित नगर निकाय का निर्वाचक हो। 30 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो। धारा-43कक (1) (ख)। सदस्य न.पा.परि./नगर पंचायत हेतु सम्बन्धित नगर निकाय का निर्वाचक हो। 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो। धारा - 13 ग(ग)। उम्मीदवारी हेतु अनर्हताएॅ - कोई व्यक्ति नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के सदस्य पद पर निर्वाचित होने के लिए उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 13 घ तथा अध्यक्ष पर निर्वाचित होने के लिए उक्त अधिनियम की धारा-43 कक (2) में वर्णित प्रावधानों के अनुसार अनर्ह होगा। निम्न कारणों से कोई व्यक्ति निर्वाचित होने के लिए अनर्ह होगा। वह अनुन्मोचित दिवालिया हो, वह नगर निकाय या उसके नियंत्रण में कोई लाभ का पद धारण करता हो, वह राज्य सरकार/केन्द्रीय सरकार/स्थानीय प्राधिकारी की सेवा मे हो अथवा जिला सरकारी काउन्सिल/अपर या सहायक जिला सरकारी काउन्सिल/अवैतनिक मजिस्ट्रेट/अवैतनिक मुन्सिफ/अवैतनिक सहायक कलेक्टर हो। वह किसी प्राधिकारों के आदेश द्वारा विधि व्यवसायों के रुप में कार्य करने से विवर्जित किया गया हो, वह किसी स्थानीय प्राधिकारी का पदच्युत सेवक हो और पुनः सेवायोजन के लिए विवर्जित किया गया हो। भारत सरकार /राज्य सरकार के अधीन ग्रहण किये गये किसी पद से भ्रष्टाचार अथवा राजद्रोह के कारण पदच्युत हुआ हो और पदच्युत होने के कारण दिनांक से 06 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो। उसे किसी न्यायालय द्वारा इन अधिनियमों में उल्लिखित किसी अपराध के लिए दोषी पाया गया हो या सदाचार बनाये रखने के लिए पाबन्द किया गया है, और पांच वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो। उ0प्र0 नगर अधिनियम 1959 की धारा 16 के अन्तर्गत महापौर पद से हटाया गया हो और हटाये जाने के दिनांक से 05 वर्ष की अवधि समाप्त न हो गयी हो अथवा धारा-48(2) के खण्ड (क) या खण्ड (ख) (7) या (8) के अन्तर्गत अध्यक्ष पद से हटाये जाने की दशा में अपने हटाये जाने के दिनांक से 05 वर्ष की अवधि तक अध्यक्ष या सदस्य के रुप में पुननिर्वाचन का पात्र नही होगा। वह नगर निकाय को देय किसी कर का 1 वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार हो। उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा-27 व 41 की अधीन अनर्ह हो। नाम निर्देशन पत्र का मूल्य, जमानत की धनराशि तथा निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा - विभिन्न पदो के निर्वाचन हेतु नाम, निर्देशन पत्र का मूल्य जमानत की धनराशि तथा निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा पदाधिकारी क्रमशः अध्यक्ष नगर पालिका परिषद, नाम निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 500,  जमानत की धनराशि रु0 8000, अधिकतम व्यय सीमा रु0 800000। सदस्य नगर पालिका परिषद, निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 200, जमानत की धनराशि रु0 2000, अधिकतम व्यय सीमा रु0 150000। अध्यक्ष नगर पंचायत, निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 250, जमानत की धनराशि रु0 5000, अधिकतम व्यय सीमा रु0 150000। सदस्य नगर पंचायत, निर्देशन पत्र का मूल्य रु0 100, जमानत की धनराशि रु0 2000, अधिकतम व्यय सीमा रु0 30000 है।
आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार यथा अनुसूचित जाति/अनु. जनजाति/पिछड़ा वर्ग अथवा महिला हेतु सभी पदो के  लिये नाम निर्देशन पत्र का मूल्य व जमानत की धनराशि आधी होगी।  आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों द्वारा अनारक्षित पद पर नाम निर्देशन करने पर भी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिये निर्धारित नाम निर्देशन पत्र का मूल्य लिया जायेगा। नाम निर्देशन पत्र नगद मूल्य देकर क्रय किया जा सकेगा। जमानत की धनराशि चालान द्वारा ट्रेजरी में जमा करायी जा सकती है तथा चालान की एक प्रति नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न की जायेगी। चालान फार्म रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी से निःशुल्क प्राप्त होंगे। जमानत की धनराशि ट्रेजरी चालान द्वारा बैक/कोषागार में निम्न लेखा शीर्षक के अन्तर्गत जमा की जायेगी।
 8443- सिविल जमा 121 चुनाव के सम्बन्ध में जमा 05 स्थानीय निकायों के निर्वाचनों के लिए जमा- जमानत की धनराशि नकद भी जमा करायी जा सकती है जमा के प्रमाण स्वरुप रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी रसीद देगा। किसी उम्मीदवार द्वारा एक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचन हेतु अधिकतम 4 नाम निर्देशन पत्र भरे जा सकते है परन्तु उक्त निर्वाचन क्षेत्र के लिए जमानत की धनराशि एक बार की जमा की जायेगी। 
प्रस्तावक - उम्मीदवारों के नाम निर्देशन पत्र एक प्रस्तावक द्वारा  हस्ताक्षरित किये जायेगे तथा उम्मीदवार एवं प्रस्तावक का फोटो भी नाम निर्देशन पत्र पर चस्पा किया जायेगा। सदस्य नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के मामलों में प्रस्तावक उसी कक्ष का निर्वाचक हो सकता है जिस कक्ष से उम्मीदवार निर्वाचन लड़ रहा है किन्तु अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत के मामलों में प्रस्तावक उक्त निकाय के किसी भी कक्ष का निर्वाचक हो सकता है जिस निकाय से उम्मीदवार निर्वाचन लड़ रहा है। कोई मतदाता एक से अधिक अभ्यार्थी को प्रस्तावक के रुप में नाम निर्दिष्ट नही कर सकता है। 
नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न किये जाने वाले अभिलेख/प्रमाण पत्र - सम्बन्धित निकाय के एक वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार न होने का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा। उम्मीदवार जिस कक्षा का निर्वाचक है उससे भिन्न कक्ष से निर्वाचन लड़ने पर उम्मीदवार को निर्वाचक नामावली की सुसंगत प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतिलिपि संलग्न करनी होगी। जमानत धनराशि जमा किये जाने की रसीद। यदि उम्मीदवार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ी जाति का है तो उसे सम्बन्धित तहसीलदार द्वारा जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही आयोग द्वारा जारी आदेश संख्या -113/रा0नि0आ0अनु0-06/2009/25/09 दिनांक 08.07.2009 के साथ संलग्न प्ररुप में शपथ पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। उक्त शपथ पत्र नोटरी/तहसीलदार/नायब तहसीलदार में से किसी एक द्वारा सत्यापित कराया जा सकता है। उपर्युक्त शपथ पत्र के प्ररुप रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी से निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है। उम्मीदवारों द्वारा निर्धारित प्ररुप पर आपराधिक एवं सम्पत्तियो/दायित्यों का विवरण सम्बन्धी  शपथ पत्र भी नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न किया जायेगा। जिसका प्रारुप रिटर्निंग अधिकारी/सहायक रिटर्निंग अधिकारी से निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है तथा उक्त शपथ पत्र कार्यकारी मजिस्ट्रेट /तहसीलदार जिन्हे कार्यकारी मजिस्ट्रेट के अधिकार प्रदत्त कर दिये गये हो/सार्वजनिक नोटरी से सत्यापित कराया जा सकता है। उम्मीदवार नाम निर्देशन पत्र जमा करने की रसीद अवश्य प्राप्त करे। 
कोई प्रत्याशी किसी राजनैतिक दल द्वारा खड़ा किया गया तभी और केवल तभी समझा जायेगा जब - उस प्रत्याशी ने इस आशय की घोषण अपने नाम निर्देशन पत्र में कर दी हो। उम्मीदवार ने इस आशय की लिखित सूचना सम्बन्धित दल के प्राधिकृत पदाधिकारी द्वारा प्रारुप 7 (क) में उम्मीदवारी के अन्तिम दिनांक व समय से पूर्व सम्बन्धित निर्वाचन अधिकारी को प्रदत्त कर दी गयी हो। उक्त सूचना दल के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा अधिकृत किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रपत्र-7 (ख) पर हस्ताक्षरित हो। ऐसे प्राधिकृत व्यक्ति का नाम एवं उनके नमूने के हस्ताक्षर प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सम्बन्धित निर्वाचन अधिकारी तथा सम्बन्धित जिला निर्वाचन अधिकारी को उम्मीदवार के अन्तिम दिनांक व समय तक प्रारुप 7 (ख) में सूचित किया गया हो। प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा अपने समर्थन उम्मीदवार के पक्ष में निर्गत किये जाने वाले प्ररुप 7 (क) एवं 7 (ख) की सूचना निम्न दशाओं में मान्य नही होगी- यदि उक्त प्ररुप 7 (क) एवं 7 (ख) की सूचना फैक्स के माध्यम से प्राप्त होती है। यदि उक्त प्ररुप 7 (क) एवं (ख) की सूचना सत्य प्रतिलिपि हस्ताक्षर या मुहर द्वारा हस्ताक्षर से प्राप्त होती है। उम्मीदवारों से अपेक्षा है कि असुविधा से बचने के लिए नाम निर्देशन दाखिल करने की तैयारियाॅ समय से कर लें और वांछित अभिलेखों/प्रमाण पत्रों के साथ नाम निर्देशन पत्र दाखिल करें।

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