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Wednesday, November 8, 2017

मुम्बई से रेफर मरीज की डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ ने बचाई जिंदगी

जौनपुर। सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ ने मुम्बई से रेफर मरीज की जान बचा ली। इस सराहनीय कार्य से मरीज के परिजन उनका बखान करते नहीं थक रहे हैं, मरीज की नई जिन्दगी पाकर उनकी अपार खुशी देखते ही बन रही है। 
बताया जाता है कि जलालपुर क्षेत्र के त्रिलोचन महादेव स्थित खालिसपुर कला गांव निवासी राम लखन विश्वकर्मा उम्र (50 वर्ष) मुम्बई के थाने में रहकर रंगाई-पुताई का कार्य करते थे। एक वर्ष से उनके पेट में दर्द था। दर्द तेज होने पर दवा का सेवन कर लेते थे लेकिन दवा का असर खत्म होने पर दर्द जस की तस हो जा रही थी। कुछ माह पहले उनकी परेशानी और बढ़ गयी। तब जाकर उन्हें निजी अस्पताल में दिखाया गया लेकिन वहां किसी तरह से आराम नहीं मिला, इसी बीच पेशाब के रास्ते ब्लड जाने लगा। जिससे परिजन की बेचैनी और बढ़ गयी और उन्हें लेकर खालिसपुर गांव आ गए। दिन-प्रतिदिन रामलखन की हालत बिगडऩे लगी। जब इस बात की खबर रामलखन के दामाद राजेश विश्वकर्मा को हुई तो उसकी सलाह पर परिजन राम लखन को लेकर शहर के वाजिदपुर स्थित सिद्धार्थ हास्पिटल लेप्रोस्कोपिक एवं ट्रामा सेन्टर गए और अस्पताल के वरिष्ठ ग्रेस्ट्रो लेप्रोस्कोपिक एवं कैंसर सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ को दिखाए। उन्होंने जांच के बाद मरीज के पेट का एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करवाया। रिपोर्ट में पता चला कि पेशाब की थैली में पथरी है। डाक्टर ने कहा कि इसका शीघ्र आपरेशन होगा वरना मरीज के जान का खतरा है। परिजन आपरेशन के लिए तैयार हो गए। गत 25 अक्टूबर की रात्रि डा0 सिद्धार्थ ने आपरेशन कर दिया। क
रीब एक घंटे तक चले आपरेशन के बाद 600 ग्राम वजन की पथरी निकली। इसके बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। डाक्टर के इस पहल से रामलखन की जिन्दगी से निराश हो चुके परिजन को मानो नई जिन्दगी मिल गयी और उनके अंदर खुशी की लहर दौड़ गयी। वह फूले नहीं समा रहे हैं। अस्पताल में देखने के लिए उनके चित-परिचित और रिस्तेदारों का जमघट लगा हुआ है। सभी एक स्वर से डा0 सिद्धार्थ को धन्यवाद दे रहे हैं। 
इस बावत पूछे जाने पर डा0 सिद्धार्थ ने बताया कि इस तरह के मरीज अगर समय रहते अस्पताल पहुंच जाए तो निश्चित रूप से उनकी जान बचायी जा सकती है, लेकिन वह इस बात का पूरी तरह से ध्यान रखें कि बगैर चिकित्सक की सलाह से कोई दवा न खायें क्योंकि यह घातक हो सकता है। इससे मरीज की जान भी जा सकती है।

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