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Thursday, October 26, 2017

शिशुओ के भीतर दिव्य गुणो के संचार तथा मानव मात्र को देवत्व से ओतप्रोत करने के लिए संस्कार प्रकिया का किया गया पुनर्जागरण - सत्यनारायण महाराज

जौनपुर। संस्कार वह विधा है जिसके द्वारा मानव को महामानव देव मानव नर से नारायण तक पहुंचाने की प्रकिया संपन्न की जाती थी। राम कृष्ण ध्रुव प्रहलाद, गौतम, गाँधी आदि अनन्य अवतारी सत्ता एंव महा पुरूषो के जीवन विकास मे उनके अभिभावको एंव गुरूजनो द्वारा प्रदत्त संस्कारो का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे यहाॅ भारतीय संस्कृति में पुंसवन नामकरण, अन्नप्राशन, मुण्डन, विधारम्भ, दीक्षा, यज्ञोपवीत, विवाह, वन प्रस्थ सन्यास अन्त्योष्टि, मरोणोत्तर, इत्यादि। सोलह संस्कारो का विधान है, जो मानव जीवन के सोलह श्रृंगार माने जाते है। 
उक्त बाते शान्ति कुन्ज हरिद्वार से पधारे आचार्य पं0 सत्यनारायण ने सुजानगंज क्षेत्र के गोसाई बीर बाबा धाम स्थित दिव्य गायत्री शक्तिपीठ मंदिर परिसर मे कथा के दौरान कही उन्होने कहा कि युग प्रवर्तक परम पूज्य गुरूदेव पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य ने पुनः शिशुओ के भीतर दिव्य गुणो के संचार तथा मानव मात्र को देवत्व से ओतप्रोत करने के लिए संस्कार प्रकिया का पुनर्जागरण किया गया।
इस अवसर कार्यक्रम के आयोजक, विधाशंकर तिवारी, डा0 विद्यासागर त्रिपाठी, नारायण जी, अवधेश सिंह,  अशोक कुमार पाण्डेय, डा0 दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी, प्रज्ञा त्रिपाठी, डा0 सुषमा त्रिपाठी, डा0 आलोक त्रिपाठी, आदि उपस्थित रहे।

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