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Sunday, October 22, 2017

34 साल बाद छठ पर्व पर बन रहा ऐसा महासंयोग,पढ़ें पूरी खबर

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जौनपुर। चार दिनों का छठ पर्व सबसे कठिन व्रत होता है, इसलिए इसे छठ महापर्व कहा जाता है। इस व्रत को महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं, इसमें सूर्य की पूजा की जाती है। छठ पूजा के तीसरे और चौथे दिन निर्जला व्रत रखकर सूर्य पूजा करनी होती है।
साथ ही सूर्य की बहन छठी मईया की पूजा होती है, छठी मईया बच्चों को दीर्घायु बनाती हैं, घर के एक दो बड़े सदस्य ही व्रत पूजा का पालन करते हैं, जो यह कठिन व्रत रख सकते हैं, ज्यादातर घर की बुजुर्ग माता या दादी छठ करती हैं, घर की कोई एक दो वृद्ध मुखिया स्त्री, पुरुष बहु आदि ही छठ के कठिन व्रत पूजा का पालन करते हैं। घर के बाकी सदस्य उनकी सहायता करते हैं, बाकी लोग छठी मैया के गीत भजन गाते हैं। छठ महापर्व मंगलवार 24 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, पहले दिन मंगलवार की गणेश चतुर्थी है। गणेश जी हर काम मंगल ही मंगल करेंगे। 
पहले दिन सूर्य का रवियोग भी है, ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बन रहा है, रवियोग में छठ की विधि विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं। चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, चाहे शनि राहु कितना भी भारी क्यों ना हों, सूर्य के पूजन से सभी परेशानियों का नाश हो जाएगा। ऐसे महासंयोग में यदि सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हवन किया जाए तो आयु बढ़ती है।
पहले दिन नहाय-खाय में सुबह नदी या तालाब कुआं या चापा कल में नहा कर शुद्ध साफ वस्त्र पहनते हैं, छठ करने वाली व्रती महिला या पुरुष चने की दाल और लौकी शुद्ध घी में सब्जी बनाती है। उसमें सेंधा शुद्ध नमक ही डालते है। बासमती शुद्ध अरवा चावल बनाते हैं, गणेश जी और सूर्य को भोग लगाकर व्रती सेवन करती है। घर के सभी सदस्य भी यही खाते हैं। घर के सदस्य को मांस मदिरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
रात को भी घर के सदस्य पूड़ी सब्जी खाकर सो जाते है, अगले दिन खरना मनाया जाएगा। 

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