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Sunday, September 24, 2017

दशवीं मुहर्रम का 1/2 अक्टूबर होगा मुख्य दिन - डीएम

vijay pratapजौनपुर। जिला मजिस्ट्रेट सर्वज्ञराम मिश्र ने बताया कि इस वर्ष मुहर्रम चन्द्र दर्शन के अनुसार 21/22 सितम्बर से प्रारम्भ होकर 1/2 अक्टूबर दशवीं मुहर्रम का मुख्य दिन होगा। मुहर्रम मुस्लिम धर्मावलम्बियों पैगम्बर हजरत अली मोहम्मद साहब के नवासे व खलीफा हजरत अली के पुत्र इमाम हुसैन व उनके साथियों के कर्बला के मैदान में नृशंस हत्या की याद में मनाया जाता है।
मुहर्रम में विशेष रूप से शिया समुदाय के लोगों द्वारा मजलिसों का आयोजन किया जाता है। मातम किये जाते है तथा अलम व ताजिए निकाले जाते है। मुहर्रम माह की 7वीं, 8वीं, 9वीं, 10वीं तिथियां महत्वपूर्ण होती है, इन्हीं तिथियों में ताजिये इमाम चौक पर रखे जाते हैं तथा अलम जुलूस निकाले जाते है। मुहर्रम को मनाये जाने में कुछ समस्यायें प्रमुख रूप से प्रायः उत्पन्न होती हैं - ताजियों के जुलूस के मार्ग में पड़ने वाले विभिन्न प्रकार के अवरोधों जैसे बिजली/टेलीफोन के तार/वृक्षों की शाखाओं व मकान के छज्जे आदि को लेकर, जुलूस के आयोजकों द्वारा नये मार्ग से जुलूस ले जाने की मांग को लेकर विवाद, ताजियों के रखने के स्थल (इमाम चैक) को लेकर हिन्दुओं/मुसलमानों एवं शिया-सुन्नी समुदाओं के मध्य विवाद, जुलूस के मार्ग में पड़ने वाले दूसरे सम्प्रदाय के धार्मिक स्थलों से जुलूस निकालते समय घण्टा घड़ियाल, बाजा बजाने व भजन कीर्तन आदि का विरोध करने पर, जुलूस को करबला ले जाते समय दूसरे सम्प्रदाय के भूखण्ड से गुजरने व वापस लौटते समय विवाद, जुलूस के समय किसी वाहन टकराने आदि को लेकर उत्पन्न विवाद, परम्परा से हटकर नये ताजिया जुलूस निकालने पर विवाद, असामाजिक/अराजक तत्वों द्वारा अफवाहें फैलाने पर विवाद, मुहर्रम के सम्बन्ध में जनपद के कतिपय संवेदनशील स्थल है साम्प्रदायिक दृष्टि से जौनपुर संवेदनशील जनपद है। नगर के मोहल्ला मखदूमशाहअढ़न में एक सुन्नी मुसलमान के प्रेस के सामने शिया का इमाम चौक है। समझौते के अनुसार मुहर्रम का ताजिया रखते समय वहां केवल 5 व्यक्ति 15 मिनट तक मातम कर सकते है। समझौता उल्लंघन होने पर विवाद की आशंका रहती है। इसी प्रकार चहारसू चौराहा स्थित इमामबाड़ा 5वीं मुहर्रम को शियाओं के अलग जुलूस बाबूराम प्रधान की गली से गुजरता है। एक निर्णय के अनुसार इस गली में केवल 5 व्यक्ति अलम का जुलूस लेकर जा सकते है। व्यक्तियों की संख्या बढ़ने पर विवाद की आशंका बनी रहती है। ग्राम व थाना नेवढ़िया में इमाम चौक पर विवाद उत्पन्न होता है। 
कस्बा खेतासराय व ग्राम बरजी व शाहपुर (थाना खेतासराय) में पूर्व में ताजिया मार्ग को लेकर एक ही सम्प्रदाय शिया के मध्य विगत में विवाद हो चुका है। मोहल्ला सिपाह स्थिति झझरी मस्जिद जो पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है, सुन्नी मुसलमानों द्वारा मुहर्रम की 10 वीं तारिख को सहादतनामा बयान किया जाता है। जहां पर सुन्नी मादफ को दो ताजिए दफन हेतु पूर्वा महाइतपुर स्थित राम जानकी मन्दिर के पास करबला में ले जाया जाता है। परम्परा अनुसार ताजिया कर्बला के पहले एक हिन्दू के बाग/खेत पर रोककर फूल आदि को लेकर कर्बला में दफना दिया जाता है। वर्ष 1998 में ताजियादारों द्वारा ताजियों को कर्बला ले जाने का प्रयास किया गया, जिस पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, ग्राम देवनरायनपुर, घनश्यामपुर तथा कस्बा बदलापुर (थाना बदलापुर) में ताजिया मार्ग व दफनाने का स्थान विवादित है। मोहल्ला अजमेरी में रत्तुराम इसे चौरा बताते है। इसका वाद न्यायालय में विचाराधीन है। ग्राम समाधगंज (थाना सिकरारा) में दोनों सम्प्रदाओं के मध्य कर्बला की भूमि विवादित है। ग्राम कुधुआ (थाना सिंगरामऊ) में मुहर्रम के दिन ताजिया ले जाते समय ढोल बाजे बजाने को लेकर मुस्लिमों-हिन्दुओं के मध्य विवाद हुआ था, जनपद के कस्बा मछलीशहर, मुंगराबादशाहपुर, मड़ियाहूं, शाहगंज तथा बड़ागांव थाना क्षेत्र शाहगंज, भाउपुर अटरिया, खेतासराय, सरायख्वाजा, केराकत, सिंगरामऊ, रामपुर तथा सुरेरी मुहर्रम के दृष्टिगत संवेदनशील है। 

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