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Friday, August 4, 2017

'जीत जीत जीत' का सिद्धांत विषय पर व्याख्यान का पूर्वांचल विश्वविद्यालय में आयोजन संपन्न

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जौनपुर।वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विश्वेश्वरैया सभागार में प्रबंध अध्ययन संस्थान द्वारा शुक्रवार को 'जीत जीत जीत' का सिद्धांत विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता पूर्व प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त गिरीश नारायण पांडे ने कहा कि प्रबंधन के क्षेत्र में अंतर वैयक्तिक संबंधों के बारे में जीत जीत का सिद्धांत काफी लोकप्रिय है। जब दो व्यक्ति परस्पर संपर्क करते हैं तो चार संभावनाएं बनती है जीत-हार, हार-हार, हार-जीत और जीत-जीत। लोग अपना हित  देखना चाहते हैं यहां तक कि दूसरों के नुकसान की कीमत पर भी। समाज में अधिकांश लोगों की प्रवृत्ति ऐसी ही होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में तमाम ऐसे लोग है जो दूसरे की ख़ुशी  लिए हमेशा हारना चाहते है।
 उन्होंने कहा कि सभी को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए और ऐसी शिक्षा जो सार्थक हो, सम्यक उपयोगी हो और जो बच्चे की जिंदगी को बेहतर बनाएं, जिम्मेदारी उठाने के काबिल बनाए। आजकल शिक्षा में नकल की प्रवृत्ति फैली हुई है वह पूरी की पूरी बच्चों की फसल को पौधों को घुन की तरह बर्बाद कर रही है इससे बचना और बचाना होगा। हमें आज पर्यावरण की चिंता करनी होगी हमें आज पर्यावरण सुरक्षा से लेकर नदी, जल संग्रहण और वनस्पतियों पशु-पक्षियों सब की चिंता करने की जरूरत है।उन्होंने अहम् ब्रह्मसमि पर विस्तार से चर्चा की।
कुलपति प्रो डॉ राजा राम यादव ने कहा कि जीवन में सदा सकारात्मक सोच की आदत डालें, विद्वान एवं महापुरुषों के सानिध्य में ज्ञान अर्जित करे। व्यक्तित्व विकास के लिए इन गुणों को अपने अंदर समाहित करने की जरुरत है. संचालन मुराद अली एवं धन्यवाद् ज्ञापन डॉ वी डी शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ ए के श्रीवास्तव, डॉ अजय द्विवेदी, डॉ राज कुमार सोनी, डॉ संतोष कुमार समेत विद्यार्थी उपस्थित रहें। 

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