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Thursday, August 10, 2017

अब प्राथमिक स्कूलों में टीईटी 2011 या बीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति में आ सकती हैं दिक्कतें

इलाहाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूपी की शिक्षक भर्तियों पर 25 जुलाई के फैसले के बाद सभी विवाद समाप्त हो चुके है। शीर्ष कोर्ट ने प्रदेश सरकार पर छोड़ दिया है कि 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के 6170 बचे पदों पर नए सिरे से विज्ञापन जारी कर न्याय संगत भर्ती कर सकती है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे बेरोजगार अभ्यर्थी नौकरी की मांग कर रहे हैं जिनके पास प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए वैध डिग्री तक नहीं है।
एनसीटीआई के नियमों के मुताबिक टीईटी 2011 या बीएड अभ्यर्थियों को अब प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त नहीं किया जा सकता।
पिछले सप्ताह सैकड़ों बेरोजगारों ने जुलुस निकालकर टीईटी 2011 के अभ्यर्थियों के समायोजन की मांग की है, लेकिन सत्यता यह है कि टीईटी 2011 के प्रमाण पत्र की वैधता 25 नवम्बर 2016 में समाप्त हो चूका है, प्रमाण पत्र की वैधता शीर्ष 5 वर्ष थी जो पिछले साल ख़त्म हो गई है।
वहीँ दूसरी ओर नवम्बर 2011 में जारी प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के विज्ञापन के लिए अधिकतर बीएड अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, उस समय राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर बीएड अभ्यर्थियों के लिए आखिरी मौका दिया था। इसके पीछे आशय यह था कि बीएड में कक्षा एक से 5 तक के बच्चों को पढ़ाने का परिक्षण नहीं दिन जाता है। यही कारण है कि सहायक अध्यापक पद पर सीधी भर्ती न करके प्रशिक्षु शिक्षक नाम से बीएड डिग्री धारकों को भर्ती व नियुक्ति के बाद 6 महीने की प्रशिक्षण की शर्त रखी गयी। इसके बाद सहायक अध्यापक पद पर मौलिक नियुक्ति का प्रावधान किया गया हालांकि भर्ती में कानूनी अड़चन आने के कारण प्रदेश सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार ने 10 सितम्बर 2012 को यह समय सीमा 21 मार्च 2014 तक बढ़ाई थी।
इस लिहाज से बीएड अभ्यर्थियों की प्राइमरी स्कूलों में नियुक्ति की समय सीमा भी तीन साल पहले बीत चुकी है। एनसीटीआई के नियमों के मुताबिक टीईटी 2011 या बीएड अभ्यर्थियों को अब प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त नहीं किया जा सकता।  

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