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Thursday, June 29, 2017

जिला महिला चिकित्सालय के चिकित्सकों को मोदी सरकार का जरा सा भी नहीं है भय

आजमगढ़। सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी सरकारी अस्पताल के डाक्टर सुधरने का नाम ही नही ले रहे है। जनपद के जिला महिला चिकित्सालय में जहां प्रसव पीडित एक महिला को पहले तो भर्ती होने के लिए जद्दोजहद उठानी पड़ी। भर्ती होने के बाद महिला को देखने पहुचे डाक्टर ने जांच के नाम पर रूपये वसूले और बाद में 6000 हजार रूपये की मांग की और न देने पर प्रसूता महिला का उपचार नही करने की धमकी दी। जिसके बाद प्रसूता महिला के तीमादारों ने अस्पताल में हंगाम शुरू कर दिया। वही मुख्य चिकित्साधीक्षक का कहना है कि उनके पास जब तक लिखित शिकायत नही आयेगी तब तक वह कोई कार्यवाई नही करेगें।
आजमगढ़ जिले का महिला जिला चिकित्सालय का विवादों से चोली और दामन का रिश्ता है। आये दिन मरिजो और उनके तीमादारो से अवैध वसूली और अस्पताल में भर्ती होने नाम पर विवाद होता रहता है। आज शाम को कप्तानगंज थाना क्षेत्र के तेरही गांव के रहने वाले गुलाब राजभर प्रसव पीड़ा होने पर अपनी बेटी को लेकर महिला जिला चिकित्सालय पहुचे। काफी परेशानियों के बाद उनकी बेटी को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। लेकिन इलाज करने के लिए पहुचे चिकित्सक ने उनकी बेटी से जांच के नाम पर सात सौ रूपये वसूल लिये और यह धमकी भी दी कि पहले 6000 रूपये दो तब इलाज होगा। 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रसूता महिला ने इसकी शिकायत साथ आयी आशा कार्यकत्री से की इसी दौरान अस्पताल के कथित चैकीदार, कम्पाउन्डर और सीएमएस के ड्राइवर ने प्रसूता के पिता से 6000 हजार रूपये मांगे। जिसके बाद प्रसूता महिला के तीमादारों हंगाम शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुचे मीडियाकर्मीयों को प्रसूता के पिता ने भी आरोप लगाया कि डाक्टर ने आशा कार्यकत्री और चैकीदार के माध्यम से 6000 हजार रूपये की मांग की और न देने पर इलाज न करने की धमकी दी है। वही कथित चैकीदार और आशा कार्यकत्री मीडिया को देख रूपया लेने की बात को इंकार कर दिया। वही इस पूरे मामले पर महिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है जब तक उनके पास कोई लिखित शिकायत नही आती है तब तक वह कोई कार्यवाई नही कर सकते।

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