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Tuesday, June 6, 2017

हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्य ने तहसीलदार के साथ दुर्व्यवहार किये जाने पर प्रकट किये अपने विचार

Displaying 20170606_142626.jpgजौनपुर। जिलाधिकारी के माध्यम से समस्त प्रशासन एवं जनपदवासियों के समक्ष मैं अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ। दिनाँक 5/06/2017 को केराकत तहसील में एक घटना घटित हुई सुन के बहुत दुख हुआ,वहां पर किसी व्यक्ति ने तहसीलदार के साथ दुर्व्यवहार किया जो कि निंदनीय है।
मैं ऐसी हर घटना का विरोध करता हु जो कानून के निगाह में गलत है। किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ मे लेने का अधिकार नहीं है अथवा कानून का पालन करना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य भी है। समाजसेवी होने के नाते मैं ने केराकत तहसील के अंतर्गत आने वाले लोगो के बीच इस घटना की चर्चा की जहां लोगो द्वारा एक शब्द बहुतायत सुनने को मिले उन स्थानीय लोगो के अनुसार जो व्यक्ति तहसीलदार के साथ ये कार्य किया है वो सरासर गलत है किन्तु न्याय यही खत्म नहीं होता ,जब कोई व्यक्ति अपने किसी संवैधानिक कार्य को कराने में अक्षम हो जाता है तो थक हार कर वो व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो सकता है क्योंकि लोगो के अनुसार तहसीलदार महोदय के यहाँ कोई भी कार्य बिना रिश्वत के संपन्न नहीं कराया जा सकता।मैं हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्य होने के नाते तथा इस देश के आम नागरिक के तौर पर मैं शासन और प्रशासन के लोगो से भी विनम्र निवेदन करता हूँ कि सामाजिक संतुलन को बरकरार रखने के लिए प्रशासन को भी अपनी मर्यादा का पालन करना चाहिए। हमारे पास हर दिन ऐसे लोग आते है जो कि न्याय के लिए  परेसान होते है अधिकारी उन्हें संतोषजनक स्थिति में नहीं पहुँचा पाते। मुख्यमंत्री जी के अनुसार सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति को भी न्याय दिलाने की है।अगर मेरे शब्दों से किसी व्यक्ति विशेष की भावनाएं आहत हुई है तो मैं क्षमा चाहता हूँ।यह विचार स्थानीय सर्वेक्षण तथा दैनिक आने वाले पीड़ितों के सहयोग करने के दौरान स्पष्ट रूप से घटित घटनाओ के अनुभव के आधार पर है।आज कर्मचारी और और अधिकारी लोग के बीच प्रायः ये देखने को मिल जाता है कि वो लोग भी अपने नैतिक कर्तव्य को भूल गए है। इस जनपद के सीर्ष अधिकारियों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करते हुए ये कहना चाहता हूँ कि मेरी इन बातों  पर विचार अवश्य करें कि रिश्वत लेना भी कानूनन अपराध है और कानून में उसके लिए दण्ड का भी प्रावधान है।समाज के अंतिम व्यक्ति (आर्थिक और बौद्धिक रूप से कमजोर) को भी सरकार का सहयोग मिले न कि शोषण।

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