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Tuesday, June 27, 2017

अपने परिवार के इलाज के लिए एक विवाहिता दर-दर खा रही है ठोकरे

लखनऊ। प्रदेश के ताज नगरी आगरा में एक विवाहिता अपने पति पिता और मासूम बच्चे के इलाज के लिए बस्ती मोहल्ले वालो के दर दर जाकर भीख मांग रही है। हालत बद से बदतर है। इलाज कराने के लिए अब तक 2 लाख रूपय की रकम खर्च हो चुकी है। और 2 लाख रुपए की रकम में विवाहिता का अनाज भैंस और घरेलु सामान तक बिक चुका है। दरवाजे की कुंडी खटखटा कर झोली फैला कर अपने पति पिता और मासूम बच्ची के इलाज के लिए भीख मांगती  इस महिला का नाम सुनीता है। सुनीता ताज नगरी आगरा के आगरा फतेहाबाद मार्ग स्थित थाना पर्यटन के पास बने गरीब आवास योजना में रहती है। सुनीता का पति पंकज चाय का खोखा चलाकर अपने परिवार का रोजी-रोजगार करता था। मगर 19 जून की शाम को नशेबाज कार सवारों ने पंकज उसकी मासूम बेटी प्रियांशी, प्रियांशी की बहिन एंजिल प्रियांशी के नाना ताराचंद को रौंद दिया था। इस सड़क हादसे में 4 लोगों के गंभीर चोटें आई । जिसमें परिवार का मुखिया पंकज आगरा के शांति मांगलिक अस्पताल में मौत और जिंदगी से जूझ रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति सही ना होने से पंकज और उनके अन्य परिवारीजनों के इलाज में अब तक 2 लाख  रुपय खर्च हो चुके हैं। यह 2 लाख  रूपय की कीमत सुनीता ने अपने घर का सामान बेचकर भैंस बेचकर अनाज बेच कर और कपड़े बेच कर डॉक्टरों को चुकाई है।
अभी भी पंकज और उसके परिवारीजनों को सही होने के लिए लाखों रुपए की जरूरत है। मगर दुर्भाग्य है कि सुनीता के पास अब एक फूटी पायी भी नहीं है। जिससे वह अपने सुहाग की जिंदगी बचा सके। और ताज नगरी आगरा में समाज सेवा का चोला पहनने वाले तमाम समाजसेवी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। आखिरकार सुनीता अपने सुहाग को बचाने के लिए कॉलोनी वाले बस्ती वालों से रुपए दो रुपए 100 रुपए की भीख मांग रही है।
सुनीता की अगर बात मानी जाए तो 19 जून से अब तक खर्च हुए 2 लाख रूपय की रकम में बस्ती वालों ने  30 हज़ार रुपये चंदा करके मायके वालों ने 40 हज़ार रुपये चंदा करके दिया। सुनीता ने अपने घर का अनाज बेचकर 15000 और भैंस बेचकर 40000 रूपये डॉक्टरों को दिए हैं। इसके अलावा अब तक 11 खून की बोतल है चढ़ चुकी है। चंदा देने वाले बस्ती के लोग भी सुनीता की गरीबी और आर्थिक स्थिति पर रहम खाकर रात दिन मदद कर रहे हैं।  मगर सवाल इस बात का है कि जिस बस्ती में सुनीता रहती है। वह बस्ती गरीब आवासीय योजना है यानी बस्ती वाले भी एक लिमिट का इलाज के लिए चंदा दे सकते हैं। अपने सुहाग को सकुशल करने और दोबारा से पैरों पर खड़ा करने के लिए सुनीता सुबह 6:00 बजे घर से निकलती है साथ में मासूम बच्ची अपनी मां के साथ हर एक दरवाजे की कुंडी खटखटाती  है। और झोली फैलाकर रुपए दो रुपए सो रुपए इलाज के लिए भीख मांगती है और बस्ती वाले भी जब सुनीता की शक्ल देखते हैं तो चुपचाप उसकी झोली में अपनी सामर्थ्य अनुसार रकम डाल देते हैं। अब तक तकरीबन 10 दिन का समय बीत चुका है। इलाज में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। घर के बर्तन बजने लगे हैं मासूम बच्चे दूध और अनाज को बिलखने लगे हैं। उधर इलाज के लिए रुपए की जरूरत है। मगर उत्तर प्रदेश सरकार के वो तमाम वायदे और दावे ताज नगरी आगरा में फेल हो रहे हैं जहां सरकार हर गरीब को आवास और चिकित्सा मुहैया कराने का दावा करती है। अभी तक सुनीता को सरकारी इलाज की मदद नहीं हो सकी है। और प्राइवेट अस्पताल में  सुनीता का पति मौत और जिंदगी से जूझ रहा है।

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