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Sunday, May 7, 2017

वित्तविहीन स्कूलों के 1.92 लाख से अधिक शिक्षकों को योगी सरकार ने मानदेय न देने का लिया फैसला

लखनऊ। योगी सरकार ने वित्तविहीन स्कूलों के 1.92 लाख से अधिक शिक्षकों को मानदेय न देने का फैसला किया है। 
बता दें कि पिछली सपा सरकार ने चुनावी वर्ष में उन्हें मानदेय के भुगतान के लिए 200 करोड़ रूपये का बजट जारी किया था, पर योगी ने सरकार ने इस मामले में यू-टर्न ले लिया है। सम्बंधित अफसरों को चालू वित्त वर्ष के बजट में इस मद में राशि का प्रावधान न करने के निर्देश दिए हैं। 
वर्ष 1986 में यूपी बोर्ड ने उ० प्र० इंटरमीडिएट अधिनियम-1921 के तहत वित्तविहीन श्रेणी में मान्यता देने का प्रावधान लागू किया।
सूत्रों की मानें तो इन विद्यालयों को संचालित करने के लिए सरकार मान्यता तो देती है, पर इस पर आने वाले किसी भी तरह के खर्च उठाने की जिम्मेदारी नहीं लेती। लेकिन, प्रबंधन पर शोषण का आरोप लगाते हुए वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक लम्बे समय से सरकार से मानदेय देनें की मांग कर रहे हैं। 
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उनकी इस मांग को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया। सपा की सरकार बनने की शुरूआती वर्षों में मानदेय की व्यवस्था लागू नहीं की गयी तो शिक्षक संगठनों ने आन्दोलन भी किये। इस पर अखिलेश सरकार ने वित्त वर्ष 2016-17 में वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय जारी करने सम्बन्धी शासनादेश जारी किया।

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