menubar

breaking news

Sunday, April 23, 2017

परीक्षण करने के बाद ही दवाईयों को किया जाये लॉन्च - केंद्र सरकार

Image result for images of medicineनई दिल्ली। केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि परीक्षण करने के बाद ही दवाईयों को भारतीय बाजार में लॉन्च किया जाए, साथ ही टेस्ट के दौरान जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता की जांच भी जरूर की जाए। 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जैव-समानता अध्ययन या परीक्षण के जरिए अब सभी जेनरिक दवाओं की जांच होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि जैव-समानता अध्ययन इंसानों पर किया जाता है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि ब्लड में दवाईयों का कितना प्रभाव पड़ रहा है। अगर दो उत्पादों के जैव एक समान हैं तो इसका मतलब है कि उनकी क्वालिटी भी एक ही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। 
मालूम हो कि पीएम मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार जेनरिक दवाओं के लिए कानून बनाएगी। साथ ही सस्ती दवाओं और इलाज के लिए भविष्य में कई कदम उठाए जाएंगे।
सूत्रों की मानें तो डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर की तरफ से चलाए जा रहे 'एक्सेस' कैंपेन की दक्षिण एशिया प्रमुख लीना मेंघाने ने कहा कि जेनरिक दवाओं से मरीजों को फायदा होगा। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि ब्रांडेड दवाईयों की क्वालिटी जेनरिक दवाओं की तुलना में ज्यादा अच्छी होती है। इसी वजह से ज्यादातर डॉक्टर मरीजों को ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं, लेकिन यह बहुत महंगी होती हैं।
हालांकि अब सूचना जारी होने के बाद किसी भी ब्रांडेड दवा को भारतीय बाजार में उतरने से पहले टेस्ट और मानकों पर खरा उतरना होगा। लीना मेंघाने ने कहा, 'हम भारत में जैव-समानता अध्ययन करेंगे और लाइसेंस देने से पहले डाटा के आधार पर क्वालिटी की जांच करेंगे।'
हाल ही में सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने बताया था कि कॉम्बिफ्लेम, डी कोल्ड समेत 58 अन्य पेन किलर अपने रेगुलेटर टेस्ट में फेल हो गई हैं। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक ये घटिया क्वालिटी की दवाएं है। इसके अलावा, सिप्ला के ऑफलाक्स -100 डीटी टैबलेट्स और थियो अस्थिलिन टैबलेट्स, साथ ही कैडिला की कैडिलोज भी जांच में खरी नहीं उतरी है।

No comments:

Post a Comment