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Wednesday, March 22, 2017

रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर ! अब वेटिंग टिकट पर दूसरी ट्रेन में मिलेगी बर्थ

Image result for images of trainनई दिल्ली। रेलवे में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, उम्मीद की जा रही है कि इस बड़े बदलाव से देश के असंख्य यात्रियों को राहत मिलेगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेल यात्रियों के लिए अहम योजना का एलान कर सकते हैं। रेल से सफर करने वाले सभी यात्रियों को बर्थ की सुविधा मुहैया कराने की घोषणा सुरेश प्रभु कर सकते है। सूत्रों की मानें तो प्रभु इस बात पर मुहर लगा सकते हैं कि वेटिंग टिकट दूसरी ट्रेन में काम करे।
प्रभु की यह योजना रेल के नियमों में कई शुभ विकल्प जोड़ेगी, इसलिए इस योजना का नाम भी 'विकल्प' रखा गया है। अंग्रेजी में इस योजना को ऑल्टरनेटिव ट्रेन ऑकोमोडेशन सिस्टम (ATAS) की संज्ञा दी गई है। इसके नाम के मुताबिक ही इस योजना का काम होगा। योजना के तहत एक ही रूट पर यात्रा करने पर वेटिंग टिकट वाले यात्रियों 12 घंटों के दरमियान बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी ट्रेन में बर्थ मुहैया कराने का उद्देश्य है।
सूत्रों की मानें तो यह योजना आगामी एक अप्रैल से अमल में आएगी। लेकिन इस योजना का एक पहलू यह भी है कि दूसरी ट्रेन में बर्थ तभी दी जाएगी जब उसमें खाली बर्थ उपलब्ध होगी।
शुरुआत में योजना सिर्फ ई-टिकट वालों के लिए लागू की जाएगी। ऑनलाइन टिकट बुक करते वक्त 'विकल्प' चुनना होगा। टिकट खिड़की पर भी इस सुविधा को शीघ्र उपलब्ध कराया जाएगा।
अगर यात्री को 'विकल्प' में दी गई ट्रेन में सफर नहीं करता है टिकट कैंसिल भी किया जा सकेगा, लेकिन टिकट का कैंसेलेशन कन्फर्म टिकट के जैसा होगा।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि टिकट रद्द करने की संभावना कम ही बनेगी। इसका कारण यह है कि बुकिंग के समय पर ही यात्री को इस बात की जानकारी होगी कि विकल्प के तौर पर ट्रेन कौन सी उपलब्ध है।
इस योजना के तहत बहुत संभावना है कि राजधानी या शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन के टिकट से सफर करने वाले यात्री को मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करना पड़े या मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के टिकट वाले यात्रियों को राजधानी में भी सफर करने को मिल जाए।
राजधानी/शताब्दी टिकट वालों को मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करने पर न तो रिफंड दिया जाएगा और ना ही मेल/एक्सप्रेस टिकट वालों से राजधानी में सफर करने पर अतिरिक्त पैसा लिया जाएगा।
इस योजना के पीछे उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि इससे रेलवे की टिकट रिफंड में दी जाने वाली राशि बचेगी। जिससे रेलवे को फायदा होगा। सूत्रों के मुताबिक रेलवे को हर वर्ष तकरीबन 3500 करोड़ रुपए सिर्फ रिफंड के तौर पर देने पड़ते हैं।

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